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Showing posts from 2025

इस बार सोचा

ज़रूरी नहीं

पानी की मौत

बराबरी कैसे?

वो दहाड़ता है

तितली की मौत

बूढ़ा नाई

ख़ामोश शहर

द्वार से छोटा पहाड़

आधी रात का चांद

शानदार सफर

शहर की हवा

सड़क का पानी

धैर्यवान झाड़ी

प्लेटफॉर्म पर कुली नदारद

बैल और गाड़ियाँ

घास काटती लड़की

देरी की ट्रेन

एक कुल्फ़ी

पहली बार भोपाल

जाओ सी एम से बोलो!

कई साल बाद

दुकानदार

ग़ज़ल

बस से हैदराबाद

ये शहर इतना खामोश क्यों है

इन परिंदों को देखिए जनाब

सफ़र में चले हो तो रास्ता आसान नहीं होगा

अब जब हवा चलेगी एक सवाल होगा।

ग़ज़ल

ग़ज़ल