जाओ सी एम से बोलो!
आज बस थोड़ी लेट थी
ज्यादा नहीं दस या पंद्रह
एक सज्जन थे
उम्र अधेड़ के
गुस्सा लिए ढेर के
थे पूछ रहे कंडक्टर से
बस क्यों लेट थी
सुना क्या
आग बबूला हो उठा
जाओ किसे कहना है?
डी एम से?
जाओ बोलो
अरे जाओ जी
गाड़ी तो तुम चला रहे
हाँ मैं!
तो मैं तो अपनी ड्यूटी कर रहा
जा जिसे कहना है!
गाड़ी लेट क्यों
ठीक है जा
सी एम से बोल
बस के लोग अपने बस से बाहर
कुछ टकटकी में
कुछ मोबाइल में
कुछ बातों में खोए रहे
कुछ ही पल में
सवालिया इंसान उतरा
और बस फिर से बस
आगे चल पड़ी
अब कोई सवाल नहीं था
कोई जबाब नहीं था।



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