कई साल बाद



 

पैसे की तंगी थी या

बहुत पैसा बचाने की 

ज़रूरत थी

पता नहीं

मगर इसी हालात ने मुझे

प्रथम ऐसी से जनरल रिजर्वेशन डब्बा

में ले आया था

यहां सारी सुख सुविधाएं

सारा ऐशो आराम

सब नदारद था

पर इस बोगी

में आकर लगा

में अकेला नहीं था

सिर्फ मेरे पसीने नहीं आ रहे थे

और सब भी परेशान थे

बेबसी ने ये सब कर दिया था

पर मेरा दुख  

मेरे पास अट्टहास 

कर रहा था

मैं थोड़ा विचलित था

वो मुझे

मैं उसे देख रहा था

शेष वो दिन आंखों में

आते जाते रहे

जब पैसा को हम बहाया करते थे

रेत की तरह

पानी की तरह।

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