शहर की हवा

 


कल वो गया था

औरों को देखकर

बाहर गया कमाया

खुद पर पहले 

कम घरवाले पर 

जितना हो सका लुटाया

पहले तो खुद को सजाया

बाकी अपनों को बुझाया समझाया

शहर की हवा को 

खुद से चिपका लाया

एक दिन दो दिन

और फिर कितना दिन?

फिर वही गाँव वाला

घर वाले से लोगों

से पैसा उधार मंगवाया

और फिर उसी छूटती

हवा को बालों से पकड़

शहर की तरफ चल दिया

शायद फिर से वही

जो पहले कही।




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