तितली की मौत
बाथरूम के कमरे में अभी गया था
एक मुस्कुराती इठलाती झूमती उड़ती आई थी तितली
देखते देखते खिड़की के नीचे बनी
टैंक में न जाने क्या सोच उतरी तितली
दुश्मन मौसम हाय
ज़रा भी दया न दिखाई
पहले छुआ उसका नन्हा पैर
फिर छुआ गया पंखो का किनारा
ठंढ की मार
न हवा तेज थी
न उसके शरीर में मानो शेष जान
फिर उडी फिर गिरी
फिर कई बार गिरी
और फिर गिरती रही
अब शेष जीवन न था
मृत्यु सामने नृत्य करता था
बेबस मृतप्राय वह देखती रही
अपने होते शेष जीवन को
फिर क्षण बीते और
अंतिम क्षण आ गया
उड़ता इठलाता तितली
पड़ा था निष्प्राण
फिर न कभी उठने के लिए
फ़िर न कभी उड़ने के लिए
सारे ख्वाब रखे थे
बंद थे किसी बक्सा में मानो।



Comments
Post a Comment