पानी की मौत



 हाँ आज पानी की मौत हो गयी थी 

साथ ही प्यास की भी 

उसकी भी एक कहानी है - 

तेरह साल पहले पहल 

जब मुख्य सड़क में गाँव की तरफ़ 

जाने वाली सड़क को जोड़ा गया 

तब उस मोड़ पर 

एक चापाकल भी लगाया 

ताकि बाजू के पेड़ के नीचे 

रुकने वाले की प्यास मिट जाए 

जो आता अपनी प्यास बुझाता

 पानी भी खुश

 चापाकल भी खुश, 

उनके ख़ुशी से। 

आज दिन बदल गया

 मुख्य सड़क को फिर से 

सौंदर्यिकरण का सरकारी फरमान आ गया 

और फिर क्या था 

मिट्टी की कई परतें चढ़ाई गयी 

रोड ऊँचा हुआ 

पास का पेड़ काट दिया गया 

चापाकल, 

अपने कान तक धँस गया ज़मीन में। 

 कोई उसको पूछने वाला नहीं, 

कोई उसका गीत गाने वाला नहीं 

उसका पानी भी 

ज़मींदोज हो गया। 

वो भी अकेला, 

 पानी के साथ मर गया 

उसका चमकदार अतीत! 

भुला दिया गया। 

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