बैल और गाड़ियाँ

 अभी आंध्रा में हूँ

कई दिन हुए

कविता नहीं बुना

फिर देखा

और बन आया कविता

गाँव कस्बा 

कस्बा अब शहर बन रहा

खेतों के बीच 

राष्ट्रीय राजमार्ग जा रहा

खेतों में

क्यारियाँ

क्यारियों के बीच हल जोतते बैल

एक सीधी दिशा में

मैं भ्रमित।

ये किसान हैं

किस दिशा में?

विकास से इनका अनबन है

या विकास से कोई लेना देना नहीं

अपने अतीत के गौरव की

पुनरावृत्ति है या आदत शेष

मैं कुछ नहीं समझा

शायद आप समझे

अच्छा हो 

कोई और आपसे समझे।

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