प्लेटफॉर्म पर कुली नदारद
प्लेटफॉर्म पर कुली नदारद!
हाँ थोड़ा अटपटा है
समझना नहीं
और हां भी
प्लेटफॉर्म कोई छोटा नहीं
बड़ा है और व्यस्त भी
फिर कुली?
हाँ कुली है
मगर न के बराबर
अब उतना भी
बिल्कुल बराबर नहीं
थोड़ा बराबर।
आज काचिगुड़ा में मैं
साल के कई महीने से
देख रहा हूँ।
यहां प्लेटफॉर्म पर
एक इलेक्ट्रिक गाड़ी चलती है
जिसका भाड़ा है 50 रुपया
अक्सर मोटे
शरीर से भी, पैसे से भी
जो जहमत नहीं उठाना चाहते
इस पर बैठ जाते हैं
और मुख्यद्वार पर
कुली की पोशाक में
कुली बिल्ला लगाए
उदासीन किन्तु सचेत खड़ा
रहता है के कोई पूछ ले सामान ढोने
मगर मैंने देखा,
आते लोगों की आंखें
गाड़ी देख चमक उठती है
और इस चमक में
कुली की उत्कंठा,
आशा, उम्मीद
सब एक एक कर कहीं
खो जाते हैं
कोई ही शायद उनसे पूछता है
मगर उनका वहाँ
खड़ा रहना
शायद एक उम्मीद, आशा फिर से
उठने के लिए
काम पाने के लिए है
मशीन के युग में
अब मानवीय श्रम को कोई पूछेगा?
कब तक पूछेगा?





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