धैर्यवान झाड़ी

 धैर्यवान झाड़ी



पत्तेदार, फूलों से लदी यह झाड़ी सुंदर,  

पौधे या पेड़ में, बढ़ती धीरे पर अद्भुत।  

समय के साथ चढ़ती, इतनी सहज, इतनी गहरी, 

धरती पर अडिग अविचल अद्भुत, 

जीवन सा—कुछ छू लेते आकाश अंबर।  


कोई लाँघ देता सीमाओं के बंधनों को,  

कोई रुक जाता जहाँ छायाएँ हो गहरी।  

कोई तोड़ देता जंजीरें, कोई बना दे रेखा,  

कहानियों से बुनता अपना भाग्य निज हाथों से।  


ओ धैर्यवान झाड़ी, तेरा सत्य महान, 

हर कोई नहीं पहुँचता शिखर समान।  

पर तेरे प्रतीक्षा में, खिलते फूल कहते—  

सीमाएँ टूटती हैं, यदि हम चाहें। 

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