अब जब हवा चलेगी एक सवाल होगा।

 

अब जब हवा चलेगी एक सवाल होगा।

बताओ क्या  फिर से कोई बबाल होगा।

जब तलक ख़ामोश थे तो कोई बात नहीं।

जो हम बोल पड़े भाई तो बड़ा बबाल होगा।।

है समंदर का वजूद सारे बहते दरिया से।

दिखाओ उसकी औक़ात तो बबाल होगा।।

शाख़ पर कोई समर नहीं यहां भी वहां भी।

पूछो बहार से तो यक़ीनन बड़ा बबाल होगा।।

है रहबर तो किसी को राह दिखाता मंज़िल की।

किसे मिली मंज़िल ज़रा पूछो तो बबाल होगा।।


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