ग़ज़ल
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जीने के ढंग |
अब समझो मुश्किल कि यहां
ईमान से काम चलेगा
रहो थोड़ा शातिर और चालाक ज़रा
धंधा बड़े आराम से चलेगा
है कोई खुशी या कोई जश्न बड़ा, छुपाओ
कोई बेग़ैरत बड़े आराम से जलेगा
कोई बात हो या बड़ा मसला कोई
ठहरो,आग थोड़ी देर से बुझेगा
ज़िन्दगी है तो मुश्किल हैरत नहीं
रखो हौसला हल ज़रूर मिलेगा
वो जला है रात भर तीरगी में
रौशन और वो थोड़ी देर रहेगा



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