ग़ज़ल आधे थे अधूरे...



हम आधे थे अधूरे थे अधूरे रहेंगे

वे लोग पूरा थे, पूरा हैं, पूरा रहेंगे

उन्हें पूछेगा हर कोई हमेशा यहाँ

 गुमनाम  हम  यहाँ गुमनाम रहेंगे

वो कुछ करें तो कोई बात नहीं

बिना  करे  हम यूँ  बदनाम रहेंगे

वो ऊपर आकाश में उड़ेंगे हमेशा

नीचे धँसे पाँव हमारे चीखते रहेंगे

उनके   ख़्वाब   उनकी  हक़ीकत

हमारे   ख़्वाब  बस  ख़्वाब  रहेंगे


   

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