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Showing posts from October, 2026

गाँठ रस्सी की

अभी तो चलना है

आंगन की रस्सी

चाह

चालीस का चप्पल

शोर करना था

यहाँ वहाँ

तुम मान चुके हो

वे अभी आये हैं... ग़ज़ल

धूंध सा सब कुछ