वह माँ है
वह माँ है
वह चुप है
बत्तीस या चौंतीस की वय होगी
मगर खोई किसी बहत्तर के जैसे
चल रही है
बाजार में
उस रोड पर
दुकानों के पार
कदमों से ढलते शाम के साथ
गुजरते पास से हरेक कदमों को
समझती है
साथ उसके
उसकी नौ या दस साल की बेटी
चल रही है।
उसके पास कई सवाल है,
उसका मुँह चल रहा है
उसके लिए सब कुछ नया है
हर कोई अपना है
हर दुकान उसे बुलाती है
दूर तक फैली सड़क
उसे कुछ पल रुकने को कहती है
जिसे वह सिर्फ जानती है
पहचानती नहीं है
समझती नहीं है।



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