ट्रेन की आर ए सी
ट्रेन की आर ए सी
एक ही मंजिल और
ज़िद भी एक
साधन भी एक
तब आती है मुश्किल
ट्रेन में
टिकट में
मगर लोगों को क्या
जिसकी लगती है
वही जानते हैं।
जब पूरी की पूरी सीट आधी में बंट
जाती है।
आराम की जगह
एडजस्ट करना होता है
सोने की जगह
बैठकर जाना पड़ता है
खाना सीट की बजाय
हाथ में लेकर
हिलते ट्रेन से समझौता करना पड़ता है।
बात ये भले हो कि
आधी सीट का भाव
पूरे सीट के भाव से काम नहीं होता।
खैर ये बात अच्छी कि
जाने का लाइसेंस मिल जाता है।
नहीं से सौ गुना तो बढ़िया होता है
वरना फ्लाइट का टिकट ही,
एक बस आसरा होता है।



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