सहरसा से पटना की यात्रा

 सहरसा से पटना की यात्रा

27-06-2023 मंगलवार


बसुदेवा से सहरसा जंक्शन:

कल रात यानी 26 जून को मैं सोया तो जरूर था मगर मन में हमेशा से सवेरे जगने की बातें कहीं किसी कोने में बैठी रही नींद 11:30 बजे के आसपास आ सकी 27 तारीख की सुबह मैं लगभग 4:00 जग गया फिर जाकर नित्य क्रिया से निवृत्ति प्राप्त करने में लगा और 5:00 बजे तक तैयार हो गया सोचा नहा लूं मगर कपड़ा भी गाना फिर कपड़ा छोड़ना यह कोई बड़ी समस्या नहीं थी मन में यह था कि मेरे ससुर जी भी ना आएंगे फिर और लोग भी पीछे नित्य क्रिया निवृत्ति हेतु प्रस्थान करेंगे कहीं उन्हें मेरे कारण इतना सवेरे कोई दिक्कत ना हो इसीलिए मैंने ना नहाने का फैसला सही समझा फिर मुझे इतना तो पता था ही कि मैं पटना में जाकर रुकूंगा और वहां के होटल में आराम से 27 का दिन और 27 की रात बिता लूंगा पापा भी जग चुके थे पापा जल्दी नहा कर तैयार भी हो गए 6:30 बजे बॉक्सर घर से अपने विद्यालय के लिए निकल जाते हैं इसलिए भी मैं नहीं चाहता था कि मेरे कारण पापा को कोई दिक्कत हो तैयार होने में जब तक मैं वहां रहा तब तक बड़ी मम्मी से बातचीत नहीं हो सकी कारण पाटीदार वाली बातें होती हैं जब पापा मम्मी की बात उनसे नहीं हुई या होती है तो मैंने भी बात करना मुनासिब नहीं समझा आंगन में उतरते हैं सामने बैठी एक वृद्ध महिला के तरफ मेरे ससुर जी ने इशारा किया मैं उसको जाकर प्रणाम कराया फिर ध्यान आया बड़ी मम्मी भी घर में है उनको भी जाकर प्रणाम कर लिया बड़े पापा सो रहे थे इसलिए हम को मैं प्रणाम नहीं किया और वहां से चल दिया जैसे निकला मम्मी सामने थी मम्मी को प्रणाम किया उन्होंने हमेशा की तरह एक रवायत को निभाने के क्रम में मेरे हाथ में 500 का नोट मोड़ कर थमा दिय दीया मैं भी चुपचाप दरवाजे की तरफ आगे बढ़ चला जहां पापा गाड़ी पर बैठकर मेरा इंतजार कर रहे थे दिव्यांश सो रहा था अपनी मैडम से मैं मिल चुका था जाते-जाते से 3000 का छुट्टा दे दिया ताकि से कोई दिक्कत ना हो अब मैं दरवाजा पर आ चुका मम्मी ने मुझे बैग पकड़ा दिया मैंने उसे अपने दाएं जांघ पर रख लिया और फिर चलने की सोचने लगा तब तक अंकु ने आकर चरण स्पर्श किया मैंने उसे भी रवायत के अनुसार ₹500 थमा दिया यहां से मैं जा रहा हूं इस बात की खबर मैंने अपने घर पर किसी को भी नहीं दी क्योंकि मुझे लगता है इस बात से शायद उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है हलांकी एक पक्ष यह भी हो सकता है की मम्मी पापा जरूर सोचते होंगे कि मेरा बेटा कब जाएगा कब आएगा फिर भी जाने अनजाने में मैंने उन्हें सूचित करना शायद कोई महत्वपूर्ण काम नहीं समझा।

पापा ने गाड़ी आगे बढ़ा दिया अब हम लोग मेन रोड पर आ गए थे फिर वहां से होते हुए वासुदेवा चौक के रास्ते बल्हा और बला से नरिया फिर नरियार से नया बाजार और फिर नया बाजार होते हुए वीर कुंवर सिंह चौक थाना चौक दी वी रोड शंकर चौक से स्टेशन की तरफ पहुंच गया पापा को भी जल्दी थी पापा ने भी गाड़ी मोड़ कर वहां से अपने स्कूल की तरफ चल पड़े पापा ने भी जाते समय मुझे 500 का नोट आदतन या फिर रस्मो रवायत का ख्याल करते हुए थमा दिया था।

28 जून की ट्रेन पकड़ने के लिए मुझे 27 जून की सुबह ही राज्यरानी सुपर फास्ट ट्रेन पकड़नी थी। ताकि पटना पहुंचकर वहां प्रमुख स्थानों का भ्रमण कर कुछ चीजों की खरीदारी कर यह समझ लूं कि मैं पटना घूम लिया हूं।

सहरसा से पटना जंक्शन: 

गाड़ी तैयार थी प्लेटफार्म नंबर वन पर सहरसा राजरानी एक्सप्रेस गाड़ी में जाकर बैठ गया।

मुझे कोच नंबर सी टू और सीट नंबर 39 खिड़की के बगल वाली सीट मिली थी। गाड़ी खुलने के कुछ देर बाद जब परमिनिया के आसपास के इलाके दिखने लगे तो मेरी अतीत की वह बचपन की यादें फिर से जिंदा होकर सामने नाचने लगी जिस रेलवे ढाला पर मैं कभी उन बच्चों के साथ सुबह नित्य क्रिया निवृत्ति के लिए लोटा लेकर आया करता था बुधवार 1994 95 के आसपास का था जब मैं वहां 2000 एक ईसवी के आसपास रहा था वहां सुबोध मध्य विद्यालय सह जय लाल फुलेश्वरी छात्रावास परमीनिया में। मैं जब भी इस रास्ते से गुजरता हूं तो मुझे लगता है कि मैं अपने उन अतीत के बचपन की यादों के आस पास आकर किसी पीपल की छांव के नीचे किसी गर्मी की दोपहरी में बैठकर सुस्तानी लगा हूं कुछ पल के लिए तेजी से चल रहा वक्त अब ठहर सा गया है। गाड़ी बख्तियारपुर कोपरिया धमारा बदला खगड़िया मानसी बेगूसराय बरौनी होते हुए 11:30 के आसपास पटना जंक्शन पहुंच गई मुझे किसी बात की जल्दी नहीं थी आज खासकर की कहीं  12:15 बजे वाली ट्रेन दानापुर से छूट ना जाए मैं बहुत ही आराम से उतरा की की मुझे कहीं जाने की जल्दी नहीं थी और स्टेशन से बाहर निकलकर पास के होटल की तरफ गया जहां एक ने सिर्फ यह पूछा कि क्या आप सिंगल है हमने उत्तर में जवाब दिया हां और उसने कहा कि कोई भी कमरा खाली नहीं है फिर मैं वहां से आगे की तरफ चलने लगा मगर तभी एक सज्जन से दिखने वाले और तेज चाटुकार व्यक्ति ने मुझसे पूछा क्या आपको होटल में कमरा चाहिए हमने खाना मगर मेरे यहां में कोई साधारण सी हां की बात नहीं थी इसमें व्यंग था और उसके पूछने में उसकी आय थी

जिसे कमीशन भी कहा जाता है मैंने अपनी बात को जारी रखते हुए यह भी कहा हे महोदय मुझे कमरे की आवश्यकता जरूर है मगर मुझे इतना भी यकीन है कि मैं स्वयं से कमरा खोज सकता हूं और कुछ कदम आगे चलने के बाद मुझे होटल अनुपम का पोस्टर अपने बाएं हाथ पर दिखा जिस पर लिखा था कि आगे की गली में है मैं सीधा वहां पहुंच गया इस अवसर पर एक व्यक्ति बैठा था जिसकी आंखें चमक रही थी उसकी चालाकी से या फिर उसके चाटुकारिता भरे नजर से या फिर उसके तेजतर्रार और आत्मविश्वास की भावना से मैंने उससे पूछा साहब एक कमरा चाहिए उसने कहा हां 6:30 सौ का नॉन एसी है और 11 से ₹1120 का एसी है हमने कहा इससे पहले कि हमें रूम दें मैं कमरा देखना चाहूंगा मैं घर से ऊपर की तरफ गया उसने बताया 365 कमरा नंबर तीसरी मंजिल पर था देखने में कुछ साधारण सा ही लगा फिर मैंने सोचा कहां कहां जाकर भक्तों किस किस होटल में खोजो इससे बढ़िया है आराम भी हो जाएगा और जल्दी से पटना घूमने की प्लानिंग भी मैं कर पाऊंगा जैतपुर से मैंने कमरा बुक किया और उसे ऑनलाइन पेमेंट कर दिया उसने कहा की अभी आपको 12 सौ का पेमेंट करना होगा और चेकआउट के समय आपको ₹80 दे दिया जाएगा।

होटल अनुपम में ठहराव:

भाड़े पर ई रिक्शा:

पटना जंक्शन से रामचंद्रा कॉम्प्लेक्स, अटल पथ पटना:

अटल पथ से बिहार संग्रहालय:

इको पार्क:

गांधी मैदान किताब के हेतु:

गांधी मैदान का मेला:(ईशा की ख्वाहिश):

मरीन ड्राइव, पटना:

ईशा के जूती के लिए दुकानों की तलाश:

शिवपुरी एरिया:

बोरिंग रोड चौरस्ता का एरिया:

बोरिंग रोड से शिवपुरी चौरस्ता:

शिवपुरी चौरस्ता से रामचंद्रा कॉम्प्लेक्स तक पैदल यात्रा:

रामचंद्रा कॉप्लेक्स के पास रात्रि भोजन:

रामचंद्रा कॉप्लेक्स से शिवपुरी मोड़ तक पैदल यात्रा:

शिवपुरी मोड़ से बोरिंग रोड चौरस्ता तक ई रिक्शा व एक औरत यात्री का अक्खड़पन:

बोरिंग रोड से पटना जंक्शन तक ई रिक्शा:

ऑटो वाले की छुट्टा के लिए परेशानी:


सहरसा से पटना की यात्रा

28-06-2023 बुधवार

होटल चेकआउट:

रिसिपेशन मैन का व्यवहार:

अटेंडर का व्यवहार:

स्टेशन रोड से दानापुर स्टेशन के लिए ओला ऑटो से प्रस्थान:

ऑटो ड्राइवर की फुर्ती और व्यवहार:

ट्रेन में आर ए सी सीट:






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