कूड़े में नसीब

कूड़े में नसीब




ज़िंदगी कहीं खूबसूरत 

कहीं शानो शौकत 

कहीं ऐशो -आराम

कहीं महलों में 

कहीं मकानों में 

कहीं बगीचों में मुस्कुराती जिंदगी।

यहां कूड़े के ढेर में 

जिंदगी से हाथापाई करती जिंदगी।

कभी टूटी चप्पल 

कभी नंगे पांव 

कभी खाली हाथ 

कभी भरे बैग 

कभी पैदल 

कभी दौड़ती जिंदगी।

कभी रुकती 

कभी धकियाती 

कभी रोती 

कभी हल्की मुस्कुराती, यहां जिंदगी।

कूड़े के ढेर में किसी के फेंके नसीब को 

यहां तलाशती जिंदगी।

खामोश यहां जिंदगी 

लबों पर आवाज भी है, यहां जिंदगी।

कभी सुगबुगाहट कभी बरबराहट है, यहां जिंदगी।

हैं खुशियों के पल भी इसके यहां जिंदगी 

ढेर से कुछ निकले तो आंखें चमकाती जिंदगी 

ढेर में न मिली तो आंखें झपकाती उदासीन जिंदगी।

शहर के ऊंचे नसीबों को 

यहां से झांकती जिंदगी।

कभी न पूरे होने वाले ख्वाब को 

यहां संभाल कर रखती जिंदगी।

कूड़े के ढेर में, किसी के फेंके नसीब को, 

यहां तलाशती जिंदगी।


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