हाँ तुम चुपचाप रहो -ग़ज़ल


हाँ तुम चुपचाप रहो, ये ज़ुल्म बढ़ेंगे।
तू ही है सितमगर ये लोग कहेंगे।।
तुझे अपने घर में लगने लगा डर
फिर सब कहाँ रहेंगे।
तू बेज़ुबान बना ख़ामोश रह
ये बेचारे सब सहेंगे।
आज तो रोक दी तुमने ये धार
कल यही लहू बन बहेंगे।


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