तुम मुझे मारो या हम तुम्हें..... -ग़ज़ल

तुम मुझे मारो या हम तुम्हें
होगी ज़िन्दगी ख़राब।
होती दुश्मनी भी, दोस्ती भी
है ऐसी सूरत-ए शराब।
संभालो उसे,चलो निकालें
नहीं सह पाएगा वो ज़िन्दगी का अजाब।
जो पूछते हैं तुमसे बेवजह सवाल
नहीं दे पाएंगे कल तेरा ज़बाब।

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