ऐसा तो पहले न था.... -ग़ज़ल
चलती भागती दौड़ती दुनिया थम गयी,
ऐसा तो पहले न था।
प्यारे पड़ोसी रूठने लगे,
ऐसा तो पहले न था।
अपने भी अब खामोश मुह फेरने लगे
ऐसा तो पहले न था।
हवा में उड़ते को अब ज़मी भी डराती,
ऐसा तो पहले न था।
किलकारियों की जगह सन्नाटा मारता ठहाका
ऐसा तो पहले न था।
सुकून का आशियाना, बना क़ैद
ऐसा तो पहले न था।
दोस्त, दोस्ती सब 'सहर्ष' बेगाना सा
ऐसा तो पहले न था।





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