इस तरफ़ से उस तरफ़


 

मैं ज़मीन पर 

मेरे ऊपर घना, 

पर्ण विहीन, 

पीपल का पेड़। 

उसके महीन शाखाओं के बीच से 

उपर चमकता, 

 दूधिया चाँद! 

काजल सी स्याह रात में मुस्कुराती 

कईयों को सुकून दे रही थी, 

ज़मीन से बहुत दूर! 

 नीचे इंसान के पास इंसान 

इंसान के बीच इंसान 

इंसान के लिए इंसान 

इंसान से जल रहा है 

गिरा रहा है। 

दूर पास है, 

अपना है, हक़ीकत है। 

 पास दूर है, पराया है, सपना है। 

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