अरमानों का फीता


 

सड़क पर गिरा था 

एक घड़ी का फीता 

टूटा नहीं था, 

पुराना नहीं था, 

बस उस घड़ी से अलग हो गया था, 

 वो घड़ी! 

 जिसे किसी ने 

अरमानों की तरह पहना था

 भले ही बाज़ार में 

सस्ता मिला हो। 

लेकिन 

उसके लिए तो महंगा ही होगा 

भले ही सस्ता होना, 

टिकने का सबूत न हो 

वो घड़ी टूट गयी 

मगर खरीददार के अरमान, 

 ज़रूर पूरे हुए होंगे;

जब तक हाथ में था, 

ज़रूर, 

उसका एहसास बड़ा हुआ होगा 

उसके चेहरे पर, 

 मुस्कान का बसेरा रहा होगा 

गर्व हुआ होगा, 

औरों से अलग दिखा होगा। 



Comments

Popular Posts