बूढ़ी आँखें


आज का उसे पता है

कल की भी उसे ख़बर है

यहाँ रात है देखो,

वहां पूरा सहर है।

उसे कम क्यूँ आँकना

उसे बहुत पता है,

माना कि उम्र हो गयी

मगर उसे सब पता है।

जाओ अब और देर न करो

उनसे मिलो कुछ सीख लो,

कैसे काट दी उसने उम्र तमाम

ये गूढ़ सीख लो।

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