ग़ज़ल


आंखें पथरा गई इंतज़ार करते करते

वो साहब आये मगर देर करते करते

वो वक़्त बेवक़्त आये तो कुछ नहीं

हम लूटे गए इंतज़ार करते करते

वो ठहरे बेदर्द बेअदब भला

हम रहे परेशां इंतज़ार करते करते

बेवफाई रहा शग़ल उनका 'सहर्ष'

रहे हम बेज़ार इज़हार करते करते

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