सच कहा तुमने... (कविता)


सच कहा तुमने
 अब मुझे समझ नही आती
तुम अब बड़े हो गए
समझ नहीं आती।

तेरे तुतलाती ज़ुबाँ
के हज़ार मतलब थे
अब मेरी बात तुझे 
समझ नहीं आती।

तेरे न कहे
को करता था पूरा
तुझे मेरी आह
समझ नहीं आती।

तेरी परेशानी
मेरी होती थी
अब तुझे
मेरी कराह 
समझ नहीं आती।

तेरे खर्च को
मैं ले लेता था उधार
आज दो छुट्टे की मांग
तुझे समझ नहीं आती।

तेरे खून हैं गर्म
मेरे पर गए ठंडे
मेरी बहादुरी तुझे
समझ नहीं आती।

वक़्त करता है पलटवार
तुझे क्यों
समझ नहीं आती।

Comments

Popular Posts