उम्मीदों के पाँव यूँ चल पड़े।।
फिक्र नहीं आंधी चले या आसमां गिरे।
तसव्वउर है हसीन ज़िन्दगी की,
फिर भी, जब कभी थके और थक के गिरे।
आंखों को बस दौलत मिले जो चाहा,
चाहे खुद से भिड़े या मौत से लड़े।
आख़िरी हसरत यही 'सहर्ष' मेरे खुश रहे,
कुछ पल रहूं परेशान और मौत ले उड़े।
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