ये कौन है... (कविता)

ये कौन है
जो चुपचाप पापी
काम को होके गुमनाम 
अंजाम दे रहा है।
किसकी मारी गयी है 
मति यूँ अचानक
जो ये काम हो रहा है।
कभी खेतों में तो कभी पानी
से बरामद लाश हो रहा है।
छीन के किसी की इज़्ज़त-ओ-आबरू
यूँ सारे काम कर रहा है।
आखिर कौन है चुपचाप,
कौन शह दे रहा है!
जो कोई ये काम घृणित
बेख़ौफ़ कर रहा है।

रहे यूँ ही ख़ामोश,
और बने जो चालबाज़
क्षण दूर नही,
जब नहीं सुनेगा कोई तेरी आवाज़,
सोच-
चल पकड़ते हैं,
उस ज़ुल्मी हत्यारे को
भूल के कि पुलिस अब काम करेगी।
इसकी टोपी उसके नाम धरेगी
भटक जाएगी ये फ़ाइल और आवाज़ भी
जब कोई राजनीति की
कोई गंदी धुआं उठेगी।

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