सड़क के बीचों बीच
भागती दौड़ती चलती इठलाती
कई छोटे बड़े
पतले मोटे टायर के बीच
कभी जानवरों के
मज़बूत खुर के बीच
बारिश आंधी तूफान के नीचे
मदमाते नटखट बच्चों की टोली के
मदमस्त पैरों के नीचे
धार्मिक पावों और भारी
गाड़ी के नीचे
वह सांस लेता है।
वह छोटा सा नन्हा
अकेले में आहटों के बीच तन्हा
चुपचाप सांस लेता है
एक गड्ढे में
जो छोटा है
थोड़ा गहरा है
उसका घर है
उसका आसरा है।
शायद किसी से कह रहा है
तुम इसे भर दो
तब तक मैं अपने नाजुक
छोटे पतले शाखों से इसे
भरती हूं
ताकि कोई यहां
ना गिरे ना रुके
और चलते रहे।


Comments
Post a Comment