कविता
सड़क पर नंगे पांव
खेत में फटी बनियान में
झोपड़ी में अतीत में डूबी आंखों के मालिक
यहां वहां हाथ फैलाकर रहने वाले
गिरते आंसू को पी जाने वाले
ये सब लोग कौन हैं?
सड़क पर शान से चलने वाले
महल में सुकून से बैठे
आसमान में मस्त उड़ने वाले
आधी धरती पर कब्ज़ा करने वाले
यहां वहां खड़े अट्टालिकाओं के शान
ये सब लोग कौन हैं?
क्या दोनों के रंग अलग हैं
क्या दोनों की ज़मीन अलग है
क्या दोनों की सांसें अलग हैं
क्या दोनों की धड़कन अलग हैं
क्या दोनों की जान अलग है
नहीं।
फिर क्यों दोनों अलग हैं?


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