ग़ज़ल
मुहब्बत में चोट लगी है मुझे अभी अभी
नहीं चल पाऊंगा ठीक से अभी अभी
शमा रोशन थी बड़ी देर तलक तन्हा
थक के बुझी है चुपचाप अभी अभी
बहुत देर से कोई दे रहा था आवाज़
बंद हुआ है कोई ज़ुबान अभी अभी
आहट तो थी उनके आने की पूरी 'सहर्ष'
नहीं आएगा कहा किसी ने अभी अभी


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