कविता
आज जाने का
जी नहीं कर रहा है
तुमसे बिछड़ने का
जी नहीं कर रहा है
कल मिलेंगे सही मगर
अभी बिछड़ने का
जी नहीं कर रहा है
तुम हो मेरे प्रिय
तुम हो मेरे प्रियेश
मुझे प्रेमिका का नाम मिले
जी नहीं कर रहा है
देखो बस आ रही
जा रही है
तुम भी जाओ
जी नहीं कर रहा है
लोग देखते हैं
देखते रहेंगे
तुमसे और क़रीब हो जाऊं
मगर लोग फिर
जी नहीं कर रहा है
तुम्हारे बढ़ते पहिए और ब्रेक का संगम
हो चाहे जो भी, मैं भी बढूं
जी नहीं कर रहा है
क्या कहूं
क्या लोग कहेंगे
कहने को
जी नहीं कर रहा है
मानती हूं
जानती हूं
कल हम अलग हो जाएंगे
रास्ते अलग हो जाएंगे
अभी अलग होने का
जी नहीं कर रहा है।
तुम जाओ जाना ही है अगर
मगर मेरा
जी नहीं कर रहा है।
देखो, और मत ठहरो
मेरे आंसू आ जाएंगे
तुम रोको उसे संभालो
जी नहीं कर रहा है।


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