कौआ और चील

 आज सुबह सुबह

आसमान में उड़ते कौआ 

को हवा से कलाबाजी करते देखा

जैसे हवा उसके साथ 

उसने हवा से कोई समझौता किया

दीर्घकालिक न सही

अपितु क्षणिक

उसके कम ऊंचाई

ने मुझे भ्रमित किया

फिर कई क्षण तो देखता रहा 

निरनिमेश

और

फिर उसकी हवा में कलाबाजियां देखी

एक नहीं 

फिर तो कई मर्तबा

फिर सब साफ

वो कौआ

चील था 

चील बस कौआ का भ्रम था

कौआ चील का भ्रम नहीं था।

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