बरस जाओ

 तुम्हें बरसना है

तुम्हें गर्जना है 

तुम्हें चमकना है 

हां जानता हूं 

तुम बरस जाओ

 पिछले साल भी मेरा घर पुराना था 

टूटा था 

आज भी वही है

 तुम बरस जाओ 

कहां छुपुंगा 

कहां छुपाऊंगा 

इस हाल को छोड़ो 

तुम बरस जाओ 

 डूबेंगे मेरे , 

छीनेंगे खेत मेरे 

डूबेंगे मेरे खलिहान 

तुम्हें क्या? 

तुम बरस जाओ

 हैं मेरे अरमान कई 

तुम्हें क्या? 

तुम बरस जाओ 

अभी-अभी निकला है 

छोटा अंकुर 

ये डूब जाएंगे 

तुम्हें क्या? 

तुम बरस जाओ 

मेरी ख्वाहिश है मेरी सिर्फ मेरी

टूट जाएंगे मेरे अरमान 

लूट जाएंगे 

मैं अकेला हो जाऊंगा 

तुम्हें क्या? 

तुम बरस जाओ।

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