ग़ज़ल
तुम तो हमारे थे और हम तुम्हारे तेरे सारे शिकवे गिले थे बस मेरे माना मैं था जब मुश्किल में तो तुम भी क्यों नहीं थे वहाँ मुझे घेरे तेरी दोस्ती तेरी यारी अब क्या कहूँ मिले थे शाम बिछड़ गए हम सवेरे गुस्ताख था मैं कर बैठा बड़ी गलती होता अच्छा गर रहते हम नज़र फेरे टूटे दिल से कह दिया हमने 'सहर्ष' संभल जा अब तू भी दिल धीरे धीरे









