अच्छा तो ठीक है तुम्हारी ही बात करेंगे
सुबह क्या शाम क्या तुम्हारी ही बात करेंगे
लेकिन उसका क्या सोचो तो ज़रा नाज़नीं
बग़ैर तेरे जैसे बिन पानी के मछली मरेंगे
तोड़ देते अगर हद तोड़ना ही होता हमें
सोचा तन्हा क्यों हम सब साथ चलेंगे
मेहरबानी करके तुम तुम ही रहो तो करम
जब तुम हम हुए तो फिर हम कहाँ रहेंगे
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