अब पहले जैसा नहीं


 

अपने ही खेत में 

अपनी फसल काटना और मुस्कुराना 

अब पहले जैसा नहीं।

अपने ज़ुबान की बात अपनी 

और अपने हक़ की लड़ाई 

अब पहले जैसा नहीं।

हवाओं के रुख़ के साथ मुड़ जाना 

और हवाओं के साथ चल देना 

अब पहले जैसा नहीं।

जो तुम्हारे साथ जो तुम्हारे हक़ में न हो 

उसके ख़िलाफ़ आवाज़ लगाना 

अब पहले जैसा नहीं।

अपनों के साथ अपने जैसे रहना 

अपनो से अपनी बात कहना 

अब पहले जैसा नहीं।

गैरों के खंज़र को मज़बूती से रोक लेना 

अब पहले जैसा नहीं।

अपने ही ज़मीन पर राजशाही की शान रखना 

अब पहले जैसा नहीं।

गांव वाले मेरे, गांव मेरा, गांव की बातें मेरी 

अब पहले जैसा नहीं।

हुक़ुमत से अपनी बात कहना 

और बातें मनवाना 

अब पहले जैसा नहीं।

थे सियासतदां जनता की भलाई के लिए 

अब पहले जैसा नहीं।

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