चलो चलकर ये...



चलो चलकर ये आग बुझाते हैं

न हो कोई मातम उन्हें समझाते हैं

नासमझी में निकली होगी बात

बात का उसे मतलब समझाते हैं

मेरा तेरा बस धरा का धरा रहता

ज़िन्दगी का असलियत समझाते हैं

अपनी दोज़ख़ गैरों का जन्नत हो

ऐसी ही आदमियत समझाते हैं

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