फ़िकर क्या करें अब किस लिए
जान फंसा बैठे ज़िन्दगी के लिए
उन्हें बुलाया तो वो आ गए
वरना तैयार न थे आने के लिए
कहा है तुमनें तो मुस्कुरा दिया
आँखें बैठी है फिर से रोने के लिए
मेरी दुआ तुम हमेशा खुश रहना
ग़म साथ है मेरे रहबरी के लिए
वो मसरूफ़ तो मगर खुदी में 'सहर्ष'
कौन जाए भला उसे समझाने के लिए
Comments
Post a Comment