आओ हुज़ूर तुम्हें एक बात बताते हैं
जो राज़ थी तुम्हें वो बात बताते हैं
साथ रहकर भी थे हम तन्हा
आज वो तुम्हें जज़्बात बताते हैं
रस्मे-वफ़ा में हमें क्या मिला
तुम्हें वो सौगात बताते हैं
बिछड़ना था उनकी दिली तमन्ना
था कैसा वो अंदाज़ बताते हैं
मूरत सी कैसे बनी थी मेरी सूरत
'सहर्ष' तुम्हें वो अंजाम बताते हैं।
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