सच तो उनसे भी... - ग़ज़ल









सच तो उनसे भी कहा न गया।
झूठ तो हमसे भी सहा न गया।।
हमने तो वो भी समझ लिया।
जो उनसे बताया न गया।।
आख़िर आँखें, बोल ही पड़ी।
जब फ़रेब दोहराया न गया।।
खानी पड़ी उन्हें अपने ही मुँह की।
जब उनसे मुझे और सताया न गया।।
क्या कहते वो हाल-ए-दिल-ए-ग़ैर
जब उनसे 'सहर्ष' अपना ही बताया न गया।


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