सड़क के बगल में सड़क
आज चलते चलते
बस यूं हीं
एक लंबी सी
दूर जाती सड़क पर
मैं ठहर गया।
जहां था वहां से
दो कदमों के फासले पर
पड़ा था अनजान
सूना सा अवशेष
जो कभी सड़क था
अब एक अवशेष मात्र।
कभी नई सड़क होने का गर्व
इसे भी था
आज उसके अवशेष
उसकी गवाही मात्र।
नए के आने से
पुराने की चमक, चहल, पहल
सब चली गई थी
शायद नियती।
यह सब लिए
एक पल उस अवशेष को
गौर से देखा
फिर पूरे नए अच्छे बने सड़क को भी
और फिर चुपचाप
चल दिया उस नए सड़क पर
अवशेष की स्मृति लिए
बहुत दिन के लिए
बहुत दूर
बहुत दूर।



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