हो सहर तो अपने राह चलूं
तन्हा मैं अपने साथ चलूं
इस रात ने सताया है बहुत
थोड़ा खुलता मुस्कुराता चलूं
सपने आंखों में नहीं हैं अब
हाथ में उठाता उछालता चलूं
चलें है गर पहुंच ही जाएंगे
रास्ते में दौड़ता सुस्ताता चलूं
आओ मुझे बाहों में थाम लो
यूं क्यों ऊंघता मदमाता चलूं
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