दबे दबे पांव से ग़ज़ल


दबे पांव वो रुखसत हो लिए

लिए आह मेरे दिल में रह गए

उन्हें कहना था कुछ शायद

दिल की बात लबों पे रह गए 

 होता गर मयस्सर साथ उसका

था कुछ ज़रूरी, वो चल दिए

था उन्हें भूलना भी, देखना भी

वो ऐसे क्यों नज़रों से चले गए

आह से ही रहेंगे ज़िंदा 'सहर्ष' 

 अब क्या ख़बर कब चल दिए

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