ग़ज़ल



 सारी ज़मीन सारा आसमां डूब गया

तेरे ख्वाब में मेरा सारा जहां डूब गया

हां उसके आँखों के समंदर में देखा

फिर तो मेरा सारा नज़र डूब गया

कहा उनसे संभल कर रहने को

देखो एक कतरे में शहर डूब गया

माना डूबते तो बचाया तो क्या मगर

उसकी ज़िंदगी सारा अरमान डूब गया


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