ज़िंदा होने का एहसास
ज़िंदा होने का एहसास
मन में यूं ही कुछ ख्याल
उमरते बादल की भांति
इधर उधर घुमड़ रहे थे
मन को शांति चाहिए था
पास में पसरा अशांति
मुंह खोले बैठा था।
समय का गुज़र जाना
ने थोड़ी राहत दी
पास पड़े चीज़ को
नज़र करने की ताक़त दी।
एक काला सा निष्प्राण
कोई कभी उड़ने
फुदकने वाला
जैसे लगा शरीर
के हर अंग को पसार कर
सावाशन में लेटा था।
तभी पानी की धार ने उसे हिलाया
मगर वह हिलकर भी नहीं हिला
मेरा मन क्षणिक अशांत फिर हुआ
सारे दर्शन
एक तरफ जा कर
थके बारातियों की तरह निष्प्राण हो गए।
लिए आंखें निर्णिमेष
मैं उस गतिहीन निष्प्राण को देखता रहा
उसके क्षणिक एहसास
ने जिंदा होने का एहसास दिया था
वो जा चुका था।
मगर मैं वहीं था,
वहीं पर था।
निर्णिमेश
गतिहीन
अचल
शांत
निश्चल
स्तब्ध।
एक बार फिर से-
मन में यूं ही कुछ ख्याल
उमरते बादल की भांति
इधर उधर घुमड़ रहे थे
मन को शांति चाहिए था
पास में पसरा अशांति
मुंह खोले बैठा था।



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