ग़ज़ल

 


उनसे कहना ज़रूरी था

और चुप रहना ज़रूरी था

हुआ क्या था कब और कैसे

एहसास दिलाना ज़रूरी था

वक़्त तो बीत जाएंगे

वक्त को बताना ज़रूरी था

हुए थे फासले जो मिलने में

उसे मिटाना ज़रूरी था

उलझे थे कुछ तार सुलझाने में

उसे सुलझाना ज़रूरी था


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