ठंडी हवा
चल रही है हवा सांय सांय
लगे हैं गोली जैसे धाँय धाँय
इधर ढक लूँ या उधर उखारूं
मुश्किल है खुद को कैसे बचा लूँ।
वो हैं अमीरों की शान
उन्हें कोई असर नहीं
मैं बेज़ार हूँ पड़ा यहाँ
किसी को नज़र नहीं।
न घर है न ठिकाना कोई
है बेबसी और न बहाना कोई
आ जाओ कोई बन फ़रिश्ता यहां
सुना है फ़िज़ा में रहता है कोई।
आती जाती हवा के संग
मेरा भी ग़म बहता जाए
मुस्कराए मुद्दत हुए
इस ग़रीब को हँसाया जाए।
अब ये मुश्किल काश थम जाए
मेरे बढ़ते कदम काश जम जाए
हो एहसास-ए-सुखन ज़िन्दगी का
फिर चाहे सनसें जम जाए।



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