चलते चलते








चलते चलते तुमने राह क्यों बदल लिया

छोड़ के तुझे ये राह उधर क्यों चल दिया

इसी रास्ते ने सफर में कितनों को अक्सर

कभी खुशियाँ तो कभी एक महल दिया

तू जाता है तो जा वहाँ है तेरी मर्ज़ी

मगर लोग न कहे तूने रीत बदल दिया

है आसान बहुत के बदल दो चाहो जिसे

फिर हैरत क्या के खुदी को बदल दिया



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