आगे बढ़ो (कविता)
जानता हूं।
मगर मजबूत हो,
मत भूलना।
यह सोने वाली दुनिया है,
और इसके लोग।
किसी को तुमसे क्या,
बस यूं ही आए और गए,
हैं सब।
तुम्हारा ग़म, तुम्हारी आवाज,
इनके कान बंद हैं,
परवाह नहीं।
अपनी आवाज बस बुलंद रखो।
सुना है पहाड़ में भी,
दरिया सुराख़ करता है।
चलो हौसला मिला।
कदम लड़खड़ाऐंगे जरूर,
मगर खुदी को संभालो।
मंज़र आज नहीं, तो कल बदलेगा।
भला वक्त कब आराम फरमाया।
तेरी खुशी, भले तुझे नसीब ना हो।
तेरे बाद को ही सही।
इसी उम्मीद में आगे बढ़ो।
देखो, कोई चराग रोशन है।
तेरी रहनुमाई के लिए,
आगे बढ़ो।






Comments
Post a Comment