होगी ये रवायत....ग़ज़ल


होगी ये रवायत किसी और शहर में।।
मेरी नहीं सही, आपके नज़र में।।
के मिलते हैं मुश्किल से आदमी, आदमी से,
हों चाहे वो बाहर से, या घर में।
बहुत अमन है यहाँ,खुदा का शुक्र है,
कितनी यारी है इस शहर में।
वो कह जाते हैं बड़ी से बड़ी बात,
मगर रह जाती है कमी उसके असर में।
अपना ही अपने से हुआ था रुख़सत, 'सहर्ष'
अपनों ने जाना ये बात किसी खबर में।

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